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पटना नगर निगम ने विज्ञापन (संशोधन) विनियम 2025 पारित कर शहर में पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि का नया अध्याय खोला

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पटना: पटना नगर निगम ने शुक्रवार को शहर में विज्ञापन तंत्र को सुदृढ़ करने और राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए विज्ञापन (संशोधन) विनियम 2025 को पारित किया। यह बैठक होटल मौर्या में महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में हुई, जिसमें निगम परिषद के सभी सदस्य उपस्थित थे और साढ़े तीन घंटे तक मैराथन चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह विनियम पास किया गया।
सीधे निगम से लाइसेंस अनिवार्य:
नई नीति के तहत अब किसी भी विज्ञापन एजेंसी को निगम क्षेत्र में काम करने के लिए सीधे पटना नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस विज्ञापन लगाने पर निगम उच्चतम विज्ञापन मूल्य का 200% जुर्माना लगाएगा। इसका उद्देश्य अवैध विज्ञापन, बिचौलियों और विज्ञापन माफिया पर लगाम लगाना है।
शहर को जोनों में बांटा गया:
नगर निगम ने शहर को चार मुख्य जोनों में बांटा है ताकि कुछ चुनिंदा एजेंसियों के वर्चस्व को खत्म किया जा सके। इसके साथ ही, मेट्रो और एयरपोर्ट जैसे क्षेत्रों से होने वाली विज्ञापन आय में निगम को 25% हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई है।
राजस्व नुकसान और डिजिटल समाधान:
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बैठक में बताया कि वर्ष 2014 से अब तक विज्ञापन के क्षेत्र में स्पष्ट नीति और नियमित वसूली न होने के कारण निगम को लगभग 840 से 1440 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। वर्तमान में सक्रिय 54 एजेंसियों पर निगम का 108 करोड़ रुपये बकाया है।
नई प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल आधारित होगी। एजेंसियों को तीन साल के लिए केंद्रीकृत लाइसेंस लेना होगा, जिसके लिए निबंधन शुल्क 1.50 लाख रुपये और नवीकरण शुल्क 60 हजार रुपये तय किया गया है। आवेदन, ई-टेंडर, दस्तावेज़ सत्यापन और भुगतान सभी ई-प्रोक पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। निगम का अनुमान है कि केवल लाइसेंस शुल्क से ही सालाना 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान:
सड़क सुरक्षा के मद्देनज़र ट्रैफिक सिग्नल और रंग-बिंदी जैसे विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। रात 12 बजे के बाद एलईडी विज्ञापनों की चमक कम करना अनिवार्य होगा और आंखों को चुभने वाले फ्लैशिंग विज्ञापनों पर प्रतिबंध रहेगा। विज्ञापन अब चार श्रेणियों तक सीमित रहेंगे:
बड़े होर्डिंग्स
सार्वजनिक स्थल जैसे पार्क और बस शेल्टर
वाहन आधारित विज्ञापन
व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के साइन बोर्ड
वित्तीय और विकास लाभ:
महापौर सीता साहू ने बैठक में कहा कि इस नई नीति से नगर निगम का आंतरिक राजस्व मजबूत होगा और विज्ञापन से होने वाली कमाई का उपयोग सड़क मरम्मत, स्वच्छता अभियान, स्ट्रीट लाइट, शुद्ध पेयजल आपूर्ति जैसी सेवाओं में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह नीति पटना को न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएगी, बल्कि शहर को अव्यवस्थित होर्डिंग्स और माफिया से मुक्त कर सौंदर्यपूर्ण रूप भी देगी।
सदस्यों की भागीदारी और सुझाव:
बैठक में पार्षदों ने विज्ञापन दरों के निर्धारण पर सुझाव दिया कि न्यूनतम दर 10 रुपये प्रति वर्ग फीट से अधिक होनी चाहिए। पार्षद आशीष कुमार सिन्हा ने कहा कि शहर की वास्तविक क्षमता को देखते हुए दरें 60-70 रुपये प्रति वर्ग फीट तय की जानी चाहिए। पूर्व उपमहापौर विनय कुमार पप्पू और पार्षद सतीश गुप्ता ने अवैध होर्डिंग्स और सरकारी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
इस बैठक में उपमहापौर, सभी स्थायी समिति सदस्य और निगम पार्षद उपस्थित थे। यह नई नीति पटना नगर निगम के लिए राजस्व वृद्धि, पारदर्शिता और सुरक्षित शहर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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